एक कम्प्यूटर सॉफ़्टवेयर डेवलपमेंट कम्पनी में एक ऑफिस बॉय काम करता था. वह सभी कर्मचारियों को चाय, कॉफ़ी इत्यादि पिलाया करता था. वह समर्पित इंसान था, परंतु वह अनपढ़ था, जिससे कभी कभी उसे मुश्किलों का सामना भी करना पड़ जाता था. अपने कठिन परिश्रम से वह लोगों का दिल जीत कर काम कर रहा था. एक दिन कंपनी में एक सर्कुलर जारी हुआ जिसमें प्रॉडक्टिविटी बढ़ाने के नाम पर उन सभी कर्मचारियों की छंटनी कर दी गई जो पढ़े लिखे नहीं थे. लिहाज़ा उस ऑफ़िस बॉय की नौकरी भी जाती रही. उसने जीवन यापन के लिए पुराने कम्प्यूटरों को खरीदने-बेचने का धंधा शुरू कर दिया.उसका यह धंधा चल निकला और वह देखते ही देखते देश का सबसे बड़ा सेकण्ड हैण्ड हार्डवेयर दुकानों की शृंखला का मालिक बन गया. उसने अपने धंधे को डाइवर्सिफ़ाई करने के इरादे से ताबड़तोड़ सॉफ़्टवेयर कंपनियाँ खरीदने लगा. उसने वह सॉफ़्टवेयर कंपनी भी खरीद ली जिसमें से उसे ऑफ़िस बॉय के रूप में निकाल दिया गया था.उस कंपनी के काग़ज़ात उसके पास दस्तखत के लिए लाए गए. उसके होठों पर विद्रूपता की क्षीण सी मुस्कान उभरी. वह बोला – अगर मुझे दस्तखत करना आता होता तो इस कंपनी में मैं अभी भी ऑफ़िस बॉय ही बना रहता...
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